On Page SEO क्या है ? पूरी जानकारी हिंदी में

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On Page SEO in Hindi – ऑनलाइन दुनिया एक ऐसा बाजार है जहाँ आपको अपनी पहचान बनाने के लिए Optimization करनी पड़ती है। ताकि आप इस ऑनलाइन बाजार में अपने प्रोडक्ट को कस्टमर्स के सामने ला सकें। और यह चीज़ इस बात को सुनिश्चित करने के साथ शुरू होता है कि आप On Page SEO Basics clear हो।

पिछले कुछ वर्षों में, ऑन-पेज “नियम” काफी बदल गए हैं। और इसी वजह से हम उससे आगे के पेजेज को देखते भी नहीं है। ये इसलिए हो रहा है क्युकी गूगल दिन प्रतिदिन smart होता जा रहा है । गूगल के bots हमेशा उसको वेब्सीटेस की जानकारी देते रहते हैं ताकि गूगल उन वेब्सीटेस को उनके quality के हिसाब से रैंक कर सके।

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What is On Page SEO in Hindi [On Page SEO क्या है]

अब हम बात करते हैं की On Page SEO होती क्या है। अगर हम आसान भाषा में आपको बताएं तो On Page SEO वो हर एक चीज़ होती है जो हम अपनी वेबसाइट पर करते हैं उसकी रैंकिंग को बढ़ने के लिए। On Page SEO में बहुत सारे factors होते हैं जिनके ऊपर हम कामर करते हैं। ताकि हमारी वेबसाइट की रैंकिंग बढ़ सके और उसपर अच्छा ख़ासा trafific आ सके। आज हम On Page SEO के उन सभी factors के बारे में आपको बताएंगे। जो की आपके वेबसाइट की रैंकिंग को बढ़ाने में मदत करेगा।

Meta Tags

हमारे जितने भी search engines हैं वो सब उन्ही मेटा टैग्स को रीड करते हैं ताकि search engines ये पता लगा सकें की आपकी वेबसाइट किस बारे में हैं।  आप अपनी वेबिस्ते का जो भी Title , Description , Tags डालते हैं वो सब आपको इन्ही मेटा टैग्स में डालने होता है।

इन सभी टैग्स को आप अपने HTML कोड के <head > पार्ट में लिखते हैं। मेटा टैग्स में हमारे पास 4 सबसे इम्पोर्टेन्ट टैग्स होते हैं। जिनका इस्तेमाल आपको अपनी हर एक वेबसाइट पर करना ज़रूरी है क्युकी इसके बिना कोई सर्च इंजन आपके web -pages को read नहीं कर पायंगे।

  • Meta Title
  • Meta Description
  • Meta Tags
  • Meta Robots
Meta Tags in Html
Meta Tags in Html

Meta Title

ये आपकी वेबसाइट का वो टेक्स्ट होता है जो आपको browser के टॉप पर दिखता है। सर्च इंजन इस Text को आपके web -page के टाइटल के रूप में Read करता है।

आपके वेबपेज के टाइटल के लिए आपके पास कुछ characters की लिमिट होती है जो की computer के लिए 60 characters है और फ़ोन के लिए 55 characters हैं।

Meta Description

meta description में आपको अपने webpage पर दी गयी जानकारी की एक short summary लिखनी होती है। इस Text में आपको short में आपके पेज से रिलेटेड हर एक चीज़ लिखनी होती है की आपके इस webpage पर किस बारे में जानकारी दी गयी है या फिर आप कोण सी सर्विस अपने customers को दे रहे हैं।

में आपको एक चीज़ कहना चाहूंगा की एक अच्छा description आपकी वेबसाइट का CTR (Click to Rate) बढ़ने में बोहत ज़्यादा मदत कर सकता है। क्युकी आपके description को ही पढ़ कर ही लोग आपकी वेबसाइट को visit  करेंगे।

Google ने अभी अपने Search Engine Results page [SERP] में कुछ बदलाव किया है । अब आपको ३०० characters तक के डिस्क्रिप्शन को अपने results में दिखा रहे हैं।

Meta Tags in Hndi
Meta Tags in Hndi

Meta Keywords

ये टैग्स आपकी वेबसाइट के लिए सबसे  महत्वपूर्ण होते हैं। में आपको एक और बात कहना चाहूंगा की सिर्फ keywords डालकर आपकी वेबसाइट अच्छी रैंक नहीं karegi उसके अलावा भी बोहत सारे फैक्टर्स ऐसे होते हैं जिनके ऊपर आपकी रैंकिंग पर फर्क पड़ता है। तो इसका मतलब ये हुआ की आपकी वेबसाइट की रैंकिंग आपके keywords से directly इफ़ेक्ट नहीं होती है।

Meta Robots

इन टैग्स की मदत से आप सर्च इंजन को ये बताते हैं की आपके वेबसाइट के वेबपेजेस के साथ क्या करना है। जैसे की आपकी वेबसाइट कुछ pages ऐसे होंगे जो आप नहीं चाहते की गूगल पर show होने चाहिए जैसे की कोई payment page तो आपको वहां meta robots में noindex लिखना होगा।

इसमें हमारे पास 4 प्रकार के मुख्य टैग्स आते हैं जो की इस प्रकार हैं।

Index/Noindex 

ये टैग्स सर्च इंजन को बताते हैं की आपके webpages को index करना है या नहीं करना है।

Follow/NoFollow 

ये टैग्स आपकी वेबसाइट के लिंक्स के बारे में सर्च इंजन को बताते हैं की उन लिंक्स को फॉलो करना चाहिए या नहीं करना चाहिए। मान लीजिये आपने अपनी वेबसाइट पर किसी 3rd Party वेबसाइट को लिंक किया है तो जिस लिंक पर आपको भरोसा न हो की कल को ये वेबसाइट डिलीट न हो जाए तो उसको आप nofollow मार्क करना क्युकी अगर आपने उसको follow मार्क किया होगा और वो वेबसाइट डिलीट हो गयी तो उससे आपकी वेबसाइट पर नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ेगा। और उससे एक broken link आपकी वेबसाइट पर आ जाएगा।

Heading Tags

जैसे की नाम से ही ये पता लग रहा है की यह टैग headings बनाने के लिए यूज़ होता है। HTML में हमारे पास कुल मिलाकर ६ टैग्स होते हैं। जिनको हम  h1 से h6  तक होते हैं। अलग अलग प्रक्कर की हेडिंग्स के लिए अलग टैग यूज़ होता है। सभी हेडिंग्स टैगस आपको html के body टैग में मिलेंगे।

इन सभी टैग्स में h1 tag सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है। क्युकी गूगल की नज़रों में ये टैग आपके वेबपेज का title होता है। आपको एक पेज पर सिर्फ एक ही h1 tag डालना होता है।

Heading Tags in Html
Heading Tags in Html

Content Length [कंटेंट की लम्बाई]

Content length के लिए कोई भी एक fix value नहीं है। ये पूरी तरह अलग हो सकता है आपकी वेबसाइट के niche के मुताबिक। पर बहुत सारी studies में ये पता लगा है की आपके कंटेंट की जितनी ज़्यादा लम्बाई होगी उतने ही ज़्यादा chances होते हैं आपके वेबपेज के रैंक होने के।

हमने निचे आपको एक graph दिखाया है। उसमे आपको ये दिखेगा की कंटेंट की लम्बाई जितनी ज़्यादा थीहै उतने ही ज़्यादा उसको सोशल शेयर्स मिल रहे हैं। आप निचे इस graph में ये देख सकते हैं की जिस article के कंटेंट की लम्बाई 3000-10000 शब्दों की थी उन आर्टिकल्स को सबसे ज़्यादा सोशल शेयर्स मिले हैं।

On Page SEO
On Page SEO

SerpIQ के द्वारा की गयी एक और स्टडी में पाया गया की गूगल पर रैंक होने वाले टॉप 10 वेबपेजेस की कंटेंट की लम्बाई भी 2400 से 2600 शब्दों की थी।

इसके अलावा आपको अलग अलग जगह पर अलग अलग डाटा मिलेगा। आपको बस ये ध्यान में रखना है की अगर आप लम्बा आर्टिकल लिखेंगे या आपके वेबपेज पर कंटेंट ज़्यादा होगा तो आपको अच्छी रैंकिंग भी मिलेगी।

URL

आपके वेबपेज का URLभी आपके पेज को रैंक करवाने में एक बहुत बड़ा योगदान देता है। आपके URL एक दम सिंपल होना चाहिए ताकि जिससे सर्च इंजन के बोट्स आपके URL को अच्छी तरह पढ़ सकें। आपको अपने URL में अपने मुख्य keyword का इस्तेमाल करना है।

आपके URL की लम्बाई 90 शब्दों से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। ऐसा देखा गया है की अगर आप अपने URL को छोटा रखेंगे तो आपको ज़्यादा फायदा होगा रैंकिंग में।

Keyword Density

Keyword Density का मतलब होता है की आप जिस Keyword पर भी आर्टिक्ल लिख रहे हैं वो Keyword आपने अपने आर्टिकल में कितनी बार यूज़ किया है। आसान भाषा में कहूं तो यह पेज  पर शब्दों की कुल संख्या की तुलना में आपके कीवर्ड की परसेंटेज है।

आपको ये परसेंटेज हमेशा २-३% में रखनी होगी। मतलब आप अपने कीवर्ड को सिर्फ २-३% बार ही यूज़ करेंगे ताकि आपकी वेबसाइट का spam score ठीक रहे।

Image Optimization

कोई भी सर्च इंजन हमारी images को नहीं पढ़ पता है इसलिए हमे अपनी फोटोज में ALT (Alternative Tag) डालना पड़ता है ताकि सर्च इंजन हमारी images को पढ़ सके और उनको भी रैंक करवा सके।

Readability of the Content

इसका मतलब ये है की आपके articles एक डिम सिंपल लैंग्वेज में हो ताकि आपके users  हर एक चीज़ को अच्छे से समझ पाएं। अगर आप बौह्त ज़्यादा टेक्निकल भाषा का प्रयोग करेंगे तो उससे आपके users को आपकी जानकारी समझने में परेशानी होगी जिसकी वजह से वो आपकी वेबसाइट से जल्दी चले जाएंगे। और इन सब से आपकी वेबसाइट का bounce rate बढ़ेगा जिससे आपको रैंकिंग में negative प्रभाव पड़ेगा।

Internal Linking

Internal Linking का मतलब है की अगर आप कोई New आर्टिकल लिख रहे हैं और आपने पहले भी उस Article से Realted कोई दूसरा आर्टिकल लिखा हुआ है तो आपको उसको लिंक ज़रूर करें। मतलब आपको एक ही डोमेन के दो webpages को लिंक करना होता है। उसको हम Internal Linking कहते हैं। इसके के बहुत सारे फायदे हैं।

  1. आपकी वेबसाइट पर लोगो ज़यादा आएंगे।
  2. लोग आपकी वेबसाइट पर ज़ायदा देर तक रहेंगे जिससे आपकी वेबसाइट का बाउंस रेट कम होगा।
  3. आपकी रैंकिंग में इसका फर्क पड़ता है।
  4. गूगल आपकी वेबसाइट को ज़्यादा अच्छे से समझ पायेगा।

Website Speed

आपकी वेबसाइट की स्पीड अच्छी होनी चाहिए। वो ज़यादा जल्दी लोड होनी चाहिए और आपकी वेबसाइट का मुख्य कंटेंट सबसे पहले सामने आना  चाहिए।

आप अपनी वेबसाइट की स्पीड बढ़ाने के लिए कुछ चीज़ें कर सकते हैं जैसे :

आप अपनी वेबसाइट की कैश मेमोरी बना लें और उसको समय समय पर डिलीट करते रहें।

  1. आपकी वेबसाइट पर जो भी हैवी चीज़ें है उनको कंप्रेस करें।
  2. किसी भी हैवी थीम का यूज़ न करें।
  3. अपने html code को कंप्रेस करदें।
  4. css और js को minify कर दें।
  5. अपनी वेबसाइट की इमेजेज को कंप्रेस कर दें।

Conclusion

तो आज हमने On Page SEO के बारे में पढ़ा है। इनके अलावा भी बहुत सारे फैक्टर्स हैं जिनकी वजह से आपकी रैंकिंग और ज़्यादा अच्छी हो सकती है है जैसे की schema और canonical link आदि । इनके बारे में हम आने वाले पोस्ट्स में पढ़ेंगे। पर जो factors हमने ऊपर Discuss किये हैं ये सबसे Important हैं। आपको इन सभी factors को ध्यान में रख कर ही अपनी वेबसाइट की coding करनी है और Articles लिखने हैं ।

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